यह दूसरा वीडियो ऐसे समय सामने आया है जब इससे पहले जारी अपने पहले संदेश में फैसल करीम मसूद ने आरोप लगाया था कि शरीफ उस्मान हादी की हत्या जमात शिबिर से जुड़े लोगों ने की और जमातियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।
यह वीडियो बांग्लादेशी पत्रकार सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया। इसमें फैसल करीम मसूद ने ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस के उस आरोप को सिरे से खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि हत्या के बाद वह हलुआघाट सीमा के रास्ते भारत फरार हो गया। मसूद ने कहा कि उसने कभी भारत में प्रवेश नहीं किया और पुलिस का दावा पूरी तरह गलत है।
मसूद के अनुसार, उसकी पहचान शरीफ उस्मान हादी से सरकारी और आईटी से जुड़े ठेके हासिल करने के सिलसिले में हुई थी। उसने दावा किया कि मुहम्मद यूनुस के सरकारी हलकों में पैरवी के लिए उसने हादी को पांच लाख टका दिए थे। मसूद का कहना है कि यह रकम केवल लॉबिंग के लिए दी गई थी, न कि किसी गैरकानूनी उद्देश्य से।
मसूद ने वीडियो में कहा- मैंने उनसे नौकरी और कॉन्ट्रैक्ट दिलाने में मदद के लिए बात की थी। उन्होंने भरोसा दिलाया और इसके बदले पांच लाख टका मांगे, जो मैंने दिए। उसने यह भी दावा किया कि बाद में दोनों के बीच राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ा संपर्क बढ़ा और हादी ने उससे अंतरिम सरकार से जुड़े कार्यक्रमों के लिए स्वयंसेवक जुटाने में सहयोग मांगा। मसूद के मुताबिक, उनके बीच किसी तरह का विवाद नहीं था।
यह दूसरा वीडियो ऐसे समय सामने आया है जब इससे पहले जारी अपने पहले संदेश में फैसल करीम मसूद ने आरोप लगाया था कि शरीफ उस्मान हादी की हत्या जमात शिबिर से जुड़े लोगों ने की और जमातियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। उसने कहा- मैंने हादी की हत्या नहीं की है। मुझे और मेरे परिवार को झूठे मामले में फंसाया जा रहा है।